Tabulation and Computation meaning, types, objects, notes in hindi| सारणीयन और संगणना

Tabulation and Computation meaning, types, objects, qualities


Tabulation and Computation meaning, types, objects, notes in hindi
Tabulation and Computation meaning, types, objects, notes in hindi


Tabulation and Computation meaning, types, objects, qualities journalism and mass communication notes in hindi. सारणीयन और संगणना का अर्थ, प्रकार, उद्देश्य व गुण पत्रकारिता एवं जन संचार पाठ्य सामग्री व नोट्स


सारणीयन Tabulation


आँकड़ों को स्पष्ट एवं बोधगम्य बनाने हेतु उसका सारणीयन अत्यावश्यक है। सारणीयन के द्वारा आँकड़ों में सरलता तथा स्पष्टता आती है तथा वर्णनात्मक तथ्य अधिक व्यवस्थित होकर प्रदर्शन योग्य बन जाते हैं। इसके अन्तर्गत आँकड़ों को विभिन्‍न स्तम्भों एवं पंक्तियों में प्रस्तुत किया जाता है, जिससे समझने में सरलता तथा सुविधा होती है। सामान्य रूप में आँकड़ों की स्तम्भों एवं पंक्तियों में व्यवस्थित अवस्था को ही 'सारणीयन' कहते हैं।


सारणीयन के प्रकार Types of Tabulation


मुख्य रूप से सारणीयन निम्नलिखित प्रकार के होते हैं, किन्तु आँकड़ों की प्रकृति के अनुसार इसके अन्य प्रकार भी हो सकते हैं-

एकगुण सारणी 

इसके अन्तर्गत एक ही चर अथवा एक ही गुण वाली सामग्री को व्यवस्थित रूप में रखते हैं।

द्विगुण सारणी 

यह सारणी किसी चर अथवा पहलू विशेष को दो परस्पर सम्बन्धित लक्षणों के विषय में सूचनाएँ प्रदान करती है, अर्थात्‌ जब किसी एक घटना की दो परस्पर सम्बन्धित विशेषताओं को प्रदर्शित करना हो तो इस प्रकार की सारणी का प्रयोग करते है।

त्रिगुण सामग्री

इस प्रकार की सारणी में किसी चर अथवा घटना की तीन विशेषताओं के विषय में जानकारी दी जाती है।

बहुगुण सारणी 

इसके अन्तर्गत किसी चर अथवा घटना के अनेक सम्बन्धित गुणों के विषय में सूचनाएँ होती है।


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संगणना तथा निदर्शन विधि Computation and Sampling method


संगणना विधि Computation method

इस विधि के अन्तर्गत किसी भी समस्या से सम्बन्धित पूरे क्षेत्र की प्रत्येक इकाई से सूचना एकत्रित की जाती है और उससे निष्कर्ष निकाला जाता है। इस विधि को सम्पूर्ण संगणना विधि भी कहते हैं; जैसे- भारत में संगणना विधि का प्रयोग जनगणना के लिए किया जाता है, जो प्राय: दस वर्षों के बाद प्रयोग में लाई जाती है।


संगणना विधि के गुण Qualities of Computation method


संगणना विधि के गुण निम्नलिखित है-

विस्तृत सूचना, शुद्ध आँकड़े तथा विश्वसनीयता
संगणना विधि से प्राप्त आँकड़ों में अधिक विश्वसनीयता एवं शुद्धता पाई जाती है, क्योंकि इस विधि से पूरे क्षेत्र की व्यक्तिगत इकाई से सम्पर्क करके आँकड़े एकत्रित किए जाते हैं।

संगणना विधि द्वारा सभी इकाइयों की विस्तृत जानकारी प्राप्त होती है। उदाहरण के लिए भारत की जनगणना से हमें केवल व्यक्तियों की संख्या की जानकारी नहीं होती अपितु उनकी आयु, शिक्षा, व्यवसाय, वैवाहिक स्थिति इत्यादि को जानकारी भी प्राप्त होती है।

उपयुक्तता

संगणना विधि सीमित क्षेत्र एवं विभिन्‍न विशेषताओं वाले पूरे क्षेत्र के लिए अधिक उपयोगी है। इस विधि का प्रयोग वहाँ पर भी उपयुक्त माना जाता है, जहाँ गणना अध्ययन की जरूरत हो।


संगणना विधि के दोष

अधिक समय
संगणना विधि द्वारा आँकड़ों को एकत्रित करने में अधिक समय लगता है, क्योंकि आँकड़े पूरे क्षेत्र की प्रत्येक इकाई से प्राप्त किए जाते हैं। इसलिए इसमें समय अधिक लगता है।

अधिक खर्चीली
यह विधि काफी खर्चीली है, इसके लिए अधिक राशि की आवश्यकता पड़ती है, क्योंकि सूचना समग्र की प्रत्येक इकाई से एकत्र की जाती है। इसी कारण इसका प्रयोग अधिकतर सरकार द्वारा केवल प्रमुख विषयों जैसे- जनगणना इत्यादि के लिए किया जाता है।

अधिक परिश्रम
संगणना विधि द्वारा ऑकड़ों को एकत्रित करना बहुत ही अधिक परिश्रम का काम है, इसके लिए भारी संख्या में प्रगणकों की आवश्यकता होती है।


निर्दशन चुनाव के प्रमुख चरण Steps of Sampling method


निदर्शन चुनाव की कई प्रविधियाँ हैं, निदर्शन चुनाव के आधारभूत सिद्धान्त ऐसे भी होते हैं, जिनका सभी पद्धतियों में उपयोग समान रूप से होता है, इसकी प्रक्रियाओं के निम्न चरण हैं-

समग्र निर्धारण
जिस समूह से प्रतिदर्श का चयन किया जाता है, उस समूह को समग्र कहा जाता है। प्रतिदर्श चुनाव का पहला चरण समग्र का निर्धारण करना होता है, क्योंकि अगर समग्र का निर्धारण नहीं होगा तो इकाइयों का चयन करना असम्भव हो जाएगा। यदि यह इकाइयाँ समुदाय में रहने वाली जनसंख्या हो तो उसका निर्धारण सफलतापूर्वक किया जा सकता है, क्योंकि भिन्न-भिन्न समुदायों के निवासी भिन्न-भिन्न किसी एक निश्चित भौगोलिक क्षेत्र में निवास करते हैं।

प्रतिदर्श की इकाई का निर्धारण
प्रतिदर्श चुनाव का यह दूसरा चरण है। इसमें प्रतिदर्श इकाइयों का निर्धारण करना रहता है। प्रतिदर्श को चुनने के बाद यह निश्चित करना रहता है कि किन-किन वस्तुओं से प्रतिदर्श की इकाइयों को चुनना है? यदि किसी मानव के समूह का अध्ययन हो रहा हो तो यह आवश्यक नहीं है कि केवल कुछ ही व्यक्ति प्रतिदर्श की इकाई बन सकते हैं। व्यक्तियों के अलावा जिन गाँवों में वे रहते हैं, जिस रोजगार की अपनाए हुए हों, इनमें कोई भी इकाई प्रतिदर्श की हो सकती है एंव व्यावहारिक रूप में भी होती है।

प्रतिदर्श के आकार का निर्धारण
यह प्रतिदर्श चुनाव का तीसरा चरण है, इसमें प्रतिदर्श के आकार का निर्धारण करना होता है। इकाई के निर्धारण के बाद उसके आकार का निर्धारण होता है। इसके आकार का कोई आधार अथवा नियम नहीं है, परन्तु जहाँ तक हो सके प्रतिदर्श का आकार छोटे-से-छोटा हो। अगर आकार छोटा हो तो उसमें अध्ययन विषय की सभी आधारभूत विशेषताओं का होना जरूरी रहता है।

विज्ञापन के विशेष सन्दर्भ में निदर्शन प्रविधियों की विशेषताएँ-

1. समय की बचत - चयनित प्रतिनिधित्वपूर्ण इकाइयों का अध्यर्यी समय की बचत करता है।

2. धन की बचत

3. गहन अध्ययन को सम्भावना इकाइयों की संख्या कम होने से गहन अध्ययन में सरलता होती है।

4. परिशुद्ध निष्कर्ष की प्राप्ति होती है।

5. विज्ञापन के हर क्षेत्र में सुविधा प्राप्त होती है।


आँकड़ों के स्वरूप तथा प्रकार Types of Data


किसी भी शोध के लिए यह महत्त्वपूर्ण है कि आँकड़ों के कितने स्वरूप अथवा प्रकार हैं।

शोध कार्य आँकड़ों के प्रकार को दो आधारों पर जाना जा सकता है-

प्रकृति के आधार पर

प्रकृति के आधार पर आँकड़ों को दो भागों में विभाजित किया जा सकता है-

1. गणनात्मक आँकड़े वह आँकड़ा, जिसमें तथ्य को प्रकृति संख्यात्मक होती है एवं गणना के योग्य हो। जैसे- 1, 2, 1000, 3585 आदि, गणनात्मक आँकड़े कहलाते हैं।

2. गुणात्मक आँकड़े वह आँकड़ा, जो विश्लेषणात्मक पक्ष से सम्बन्धित हो, गुणात्मक आँकड़े कहलाते हैं।

मौलिकता के आधार पर

मौलिकता के आधार पर आँकड़ों को दो भागों में विभक्‍त किया जा सकता है-


1.प्राथमिक आंकड़े Primary data

प्राथमिक आँकड़ों से हमारा तात्पर्य उन तथ्यों से होता है, जिन्हें उनके उद्गम स्थलों से एकत्रित किया जाता है। वैसेल के अनुसार, “अनुसन्धान की प्रक्रिया के अन्तर्गत मौलिक रूप से जो आँकड़े एकत्रित किए जाते हैं, उन्हें प्राथमिक ऑकड़े कहते हैं। 'प्राथमिक आँकड़े' मौलिक होते है।


2. द्वितीयक आँकड़े Secondary data

ये वे आँकड़े हैं, जिनका संकलन पहले से ही किसी व्यक्ति या संस्था द्वारा किया जा चुका है और अनुसन्धानकर्ता केवल उनका प्रयोग करता है। एम एम ब्लेयर के अनुसार, ''दितीयक आँकड़े वे हैं, जो पहले से ही अस्तित्व में हैं और जो वर्तमान प्रश्नों के उत्तर के लिए नहीं बल्कि किसी दूसरे उद्देश्य के लिए एकत्र किए गए हैं।”


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